📅 25 Jul 2026 | ✍️ आचार्य जयेशभाई मेहता
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ऋग्वेद में कहा गया है - 'माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यानाममृतस्य नाभिः।' अर्थात गौमाता रुद्रों की माता, वसुओं की पुत्री, आदित्यों की बहन और अमृत का केंद्र है। कलयुग में यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन या विशेष पर्वों (अमावस्या, पूर्णिमा, जन्मदिन, श्राद्ध पक्ष) पर गौमाता को हरी घास, गुड़ या अन्न दान करता है, तो उसके घर के समस्त वास्तु दोष और नवग्रह दोष स्वतः शांत हो जाते हैं। परसा (गोजरिया) स्थित श्री श्याम गौशाला में समर्पित भाव से गौवंश की सेवा की जाती है।
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