📅 15 Jul 2026 | ✍️ आचार्य जयेशभाई मेहता
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वास्तु शास्त्र का मूल आधार पंचतत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का संतुलन है। घर के ईशान कोण (North-East) को हमेशा स्वच्छ, हल्का और खुला रखना चाहिए। जल तत्व और पूजा स्थान यहीं शुभ फल देते हैं। आग्नेय कोण (South-East) में रसोई घर का स्थान अत्यंत श्रेष्ठ है। बिना तोड़-फोड़ के भी पिरामिड, स्वस्तिक, तांबे के यंत्र और उचित रंगों के चयन से घर के वास्तु दोषों का शमन किया जा सकता है।
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